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Village Homestay : A Poetic Experience

बारोंमासा को अविस्मरणीय यात्रा कराने और कुमाऊँ के अनदेखे रंग और अनजाने स्वाद का अनुभव कराने के लिये आभार । ऐसे अनुभव हुए कि लखनऊ आते ही एक कुमाँऊनी मित्र ने ऐसे गले लगाया जैसे मैं अपने अंदर पूरा कुमाऊँ समेट लायी हूँ, उसी मित्र के अहसासों को कविता में पिरोने की कोशिश की है जिसका श्रेय निश्चय ही बारोंमासा को जाता है :

आओ तुम्हें मैं गले लगा लूँ
मेरे देस से आये हो
मेरे पहाड़ की मिट्टी- ख़ुशबू
अपने संग में लाये हो ।

ठंडी हवाओं में परबत की
बांज बुरांश की ख़ुशबू है
तेरी साँसों से पी लूँ मैं
साँसों में उन्हें बसाये हो ।
आओ तुम्हें मैं गले लगा लूँ।।

काफल बेडु और मालटे की
खटास – मिठास को चखा है
गहत – मंडवे संग भांग की चटनी
स्वाद सभी चख आए हो ।
आओ तुम्हें मैं गले लगा लूँ।।

सूरज चाँद के नित नए रंग
तारों की छटा निराली देखी
देवदारु और चीड़ पद्म सब
आँखों में भर लाये हो ।
आओ ………….

पाताल भुवनेश्वर या बैजनाथ
जागेश्वर, कसार, कौसानी,
याद बहुत आये हमको
पंत सुमित्रा और शिवानी
कविता जैसे रास्तों पर
घूम घूम कर आये हो ।
आओ तुम्हें …………..

नाच छोलिया देखा तुमने
प्यूली का त्योहार सुना
ऐपण तुमने घर घर देखा
सब को जाकर प्यार दिया
आओ …………

पंत बहुगुणा जोशी नेगी
बाल मिठाई और सिंगौड़ी
सारे स्वाद चखे परबत के
गठवानी पी के आये हो
आओ ………….

कोसी सरयू बिर्थी झरने
सब लगते हैं मन को हरने
लुकती छिपती पंचाचूली
नंदा शीश उठाए है
आओ ……………

मापना है उच्चता गिरि की तो
धीरता उसकी धारण करो
अधीर मन पर्वत लाँघ सकते नहीं
ये ‘सीख’ सीख कर आये हो ??
आओ तुम्हें मैं गले लगा लूँ
मेरे देस से आये हो ।।

– विनीता

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The Call of Bagpipes

We bring a collection of stories from the hills narrated by lofty mountains and meandering rivers, scented with the fragrance of blooming rhododendron flowers, spiced with adventures of gallivanting leopards and mythical sages surviving on magical herbs and blessed by benevolent and vengeful deities. Tales of courage, passion, resilience, determination and a history spanning thousands of years!

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